हिमाचल के इन जिलों में है सबसे ज्यादा पानी की किल्लत, 15 दिन से बूंद-बूंद को तरस रहे

हिमाचल की 1400 पेयजल योजनाएं हांफ चुकी हैं। इनके जलस्तर में 90 फीसदी तक गिरावट आई है। अन्य 1025 पेयजल योजनाओं में भी 25 फीसदी से ज्यादा जलस्तर गिरा है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में भयंकर गर्मी से दर्जनों हैंडपंप, प्राकृतिक पेयजल स्रोत और लोगों की सैंकड़ों निजी पेयजल स्कीमें भी पूरी तरह से सूख गई हैं। बहुत से क्षेत्रों में लोगों को 10 से 15 दिन बाद भी पानी नहीं मिल पा रहा। पेयजल किल्लत पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर खुद नजर बनाए हुए हैं। पिछले 4 दिन से आई.पी.एच., नगर निगम व प्रशासनिक अधिकारियों की बैठकें ले रहे हैं लेकिन इनका धरातल पर असर नहीं दिख रहा।

प्रदेश के 57 कस्बों में से 39 में पेयजल संकट बहुत ज्यादा गहरा गया है। शिमला की पेयजल व्यवस्था पर तो हाइकोर्ट तक को संज्ञान लेना पड़ा है। प्रदेश में पहली बार शिमला शहर में पानी के वितरण के लिए मुख्य सचिव को भी फील्ड में आना पड़ा है। अब हालात ऐसे हो गए हैं लोगों के पास ढोने के लिए पानी नहीं बचा है। इस कारण ग्रामीणों को सबसे ज्यादा दिक्कतें उनके पालतू मवेशियों को पानी पिलाने में हो रही हैं। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग की मानें तो शिमला, सोलन और मंडी जिला में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बनी हुई है। सिरमौर के नाहन में भी सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेशभर में भवन निर्माण कार्य न करने की अपील की है।

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